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ड्रीम वेडिंग डेस्टिनेशन का हब बनेगा उत्तराखंड, कई नए स्थल विकसित करने की तैयारी

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उत्तराखंड सरकार राज्य को विंटर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित कर रही है, लेकिन सरकार का मकसद प्रदेश में वेडिंग डेस्टिनेशन तैयार करना भी है.

देहरादून: उत्तराखंड अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेस्टिनेशन वेडिंग का नया हब बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है. राज्य सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. पहले से ही चर्चित और लोकप्रिय हो चुके त्रियुगीनारायण और रामनगर जैसे स्थलों की सफलता के बाद अब सरकार की नजर राज्य के अन्य सुंदर और अनछुए पर्यटन स्थलों पर है, जिन्हें वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा.

इसी कड़ी में जल्द ही मसूरी में एक हाई-प्रोफाइल कॉन्फ्रेंस आयोजित होने जा रही है, जिसमें मुख्यमंत्री की मौजूदगी में देशभर के नामी वेडिंग प्लानर, टूरिज्म एक्सपर्ट, होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोग और अन्य स्टेकहोल्डर हिस्सा लेंगे. इस कॉन्फ्रेंस को राज्य के टूरिज्म सेक्टर के लिए एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के विभिन्न संभावित स्थलों की पहचान करना और उन्हें वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार करना है.

खास बात यह है कि सरकार सिर्फ पारंपरिक और पहले से विकसित स्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नए और अनछुए इलाकों को भी इस पहल में शामिल करना चाहती है. उत्तराखंड के पास प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व, शांत वातावरण और पहाड़ी आकर्षण का एक अनूठा संगम है, जो इसे डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए बेहद खास बनाता है. यही वजह है कि त्रियुगीनारायण जैसे धार्मिक स्थल, जहां भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की मान्यता है, पहले से ही कपल्स के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुके हैं. वहीं रामनगर और उसके आसपास के रिजॉर्ट्स भी जंगल और नेचर थीम वेडिंग के लिए तेजी से पसंद किए जा रहे हैं. सरकार अब इसी मॉडल को विस्तार देने की योजना बना रही है.

सरकार का फोकस यह भी रहेगा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बना रहे. पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक निर्माण और भीड़भाड़ से बचते हुए एक सस्टेनेबल टूरिज्म मॉडल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा.
-धीराज गर्ब्याल, सचिव पर्यटन-

कॉन्फ्रेंस में इस बात पर विस्तार से चर्चा होगी कि किन-किन स्थानों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा सकता है और वहां किस प्रकार की बुनियादी सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए. इसमें सड़क कनेक्टिविटी, होटल और रिसॉर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, हेल्थ सुविधाएं और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. राज्य सरकार का मानना है कि डेस्टिनेशन वेडिंग इंडस्ट्री न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती है, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं. होटल, कैटरिंग, ट्रांसपोर्ट, इवेंट मैनेजमेंट, फूल सजावट, लोकल हस्तशिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़े लोगों को इसका सीधा लाभ मिलता है.इसके अलावा इस पहल से राज्य की लोक संस्कृति और परंपराओं को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावना है.

उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत, रीति-रिवाज और खान-पान को वेडिंग पैकेज का हिस्सा बनाकर एक अनोखा अनुभव तैयार किया जा सकता है, जो अन्य राज्यों से इसे अलग बनाता है. पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में राजस्थान और गोवा जैसे स्थापित वेडिंग डेस्टिनेशन को कड़ी टक्कर दे सकता है. खासकर उन कपल्स के लिए जो पहाड़ों की वादियों में, प्राकृतिक सौंदर्य के बीच और शांत माहौल में शादी करना चाहते हैं, उत्तराखंड एक परफेक्ट विकल्प बन सकता है.

न केवल मसूरी बल्कि कुमाऊं में भी सरकार एक ऐसी ही कॉन्फ्रेंस करने जा रही है ताकि गढ़वाल के अलावा कुमाऊं क्षेत्र में भी इसी तरह के डेस्टिनेशन खड़े किए जा सके.त्रियुगीनारायण और रामनगर की सफलता के बाद अब उत्तराखंड डेस्टिनेशन वेडिंग सेक्टर में एक बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है. मसूरी में होने वाली यह कॉन्फ्रेंस इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जिससे राज्य को नई पहचान और आर्थिक मजबूती दोनों मिल सकती हैं.

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