इस एक नाम से दर्ज हुईं 156 आपत्तियां, SIR से बढ़ा उत्तराखंड का सियासी तापमान, कांग्रेस बौखलाई

अब तक 12,209 वास्तविक आपत्ति आवेदन दर्ज हुए हैं. इनमें सबसे ज्यादा 156 आपत्तियां नितिन नाम से दर्ज हुई हैं
देहरादून: उत्तराखंड में दिनों SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया चल रही है. इसमें मतदाताओं की शिकायतों का ढेर लगना शुरू हो गया है. स्थिति यह है कि कुछ ही समय में सैकड़ों आपत्तियां आ चुकी हैं. लेकिन हैरानी इस बात पर है कि एक ही नाम से दो चार या 10 नहीं बल्कि 20, 50 और 100 से भी ज्यादा शिकायतें मिल रही हैं.
जाहिर है कि आपत्तियों के इन आंकड़ों को देखकर न केवल हर कोई हैरान है, बल्कि इनके फर्जी होने की भी आशंकाएं बढ़ गई हैं. हमारी खास रिपोर्ट में आंकड़ों के जरिए समझिए मतदाताओं को लेकर आपत्तियों का यह पूरा मामला.
SIR के बीच फर्जी आपत्तियों ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान: उत्तराखंड में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का काम जोर-शोर से चल रहा है. निर्वाचन आयोग के लिए मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करना जितना जरूरी है, उतना ही यह राजनीतिक दलों के लिए भी बेहद अहम है. वजह साफ है राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और चुनावी मैदान में उतरने वाले दलों के लिए मतदाता सूची सबसे महत्वपूर्ण आधार होगी. ऐसे में SIR की पूरी प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है.
19 लाख मतदाताओं को जारी हुए नोटिस: मतदाता सूची के शुद्धिकरण के तहत प्रदेश में करीब 19 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं. इसके बाद अब मतदाता सूची में शामिल नामों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराने का दौर चल रहा है. इन्हीं आपत्तियों के आंकड़ों ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है. सामने आए आंकड़ों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कुछ नामों से ही बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज की गई हैं.
एक नाम से 156 तक आपत्तियां: आंकड़ों के मुताबिक अब तक 12,209 वास्तविक आपत्ति आवेदन दर्ज हुए हैं. इनमें सबसे ज्यादा आपत्तियां एक ही नाम नितिन से जुड़ी हैं. नितिन नाम से कुल 156 आपत्तियां दर्ज हुई हैं. ये आपत्तियां जसपुर और किच्छा विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी हैं.
इन नामों पर भी आपत्तियों का सैकड़ा पार: इसके बाद विनीत गिरि गोसाई नाम से 126 आपत्तियां दर्ज हैं. कार्तिक घीक नाम से 125, अशोक प्रसाद के नाम से 113 और अभिषेक तिवारी नाम से 104 आपत्तियां दर्ज हुई हैं. इसी तरह लतिका सिकदार के नाम से 93, विजय यादव के नाम से 90, जयमहाशक्ति मिश्रा के नाम से 76, गुरमेल सिंह के नाम से 75 और रामकुमार के नाम से 73 आपत्तियां दर्ज हैं.
जसपुर सबसे आगे, किच्छा दूसरे नंबर पर: विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों को देखें, तो जसपुर में सबसे ज्यादा 3,896 आपत्तियां दर्ज हुई हैं. यहां सबसे ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराने वाले नाम के रूप में नितिन सामने आते हैं, जिनके नाम से 64 आपत्तियां दर्ज हैं.
दूसरे नंबर पर किच्छा विधानसभा क्षेत्र है, जहां 2,857 आपत्तियां दर्ज हुई हैं. यहां नितिन के नाम से 147 आपत्तियां दर्ज हैं. इसके बाद काशीपुर में 1,489, रुद्रपुर में 1,129 और रुड़की में 676 आपत्तियां सामने आई हैं. आंकड़ों में बाजपुर में 438, सितारगंज में 274, गदरपुर में 227, मंगलौर में 226 और हरिद्वार ग्रामीण में 127 आपत्तियां दर्ज हैं.
जिलेवार तस्वीर भी बेहद दिलचस्प: इन टॉप-10 विधानसभा क्षेत्रों को जिलेवार देखें तो सबसे ज्यादा आपत्तियां उधम सिंह नगर जिले से जुड़ी हैं. जसपुर, किच्छा, काशीपुर, रुद्रपुर, बाजपुर, सितारगंज और गदरपुर को मिलाकर इन सात विधानसभा क्षेत्रों में कुल 10,310 आपत्तियां दर्ज हैं.
वहीं हरिद्वार जिले की टॉप-10 सूची में शामिल तीन विधानसभा क्षेत्रों, रुड़की, मंगलौर और हरिद्वार ग्रामीण में कुल 1,029 आपत्तियां दर्ज हुई हैं. यानी केवल इन 10 विधानसभा क्षेत्रों में ही 11,339 आपत्तियां सामने आई हैं. जबकि कुल वास्तविक आवेदन 12,209 हैं. इसका मतलब है कि टॉप-10 विधानसभा क्षेत्रों में ही करीब 93 फीसदी आपत्तियां दर्ज हुई हैं. बाकी विधानसभा क्षेत्रों से कुल करीब 870 आपत्तियां इस आंकड़े के बाहर हैं.
आपत्तियों की वजह क्या? अब सवाल यह भी है कि आखिर मतदाता सूची में शामिल नामों के खिलाफ आपत्तियां किन आधारों पर लगाई जा रही हैं. आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा 8,166 आपत्तियां ऐसे मतदाताओं को लेकर हैं, जिन्हें Absent/Permanently Shifted यानी अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है.
इसके बाद 2,872 आपत्तियां Already Enrolled यानी पहले से नाम दर्ज होने के आधार पर हैं. 730 आपत्तियां Permanently Shifted, 286 मृतक मतदाताओं, 110 कम उम्र के मतदाताओं और दो आपत्तियां ऐसे लोगों को लेकर हैं, जिन्हें भारतीय नागरिक नहीं बताया गया है. 42 मामलों में आपत्ति का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है.
अपने ही नाम के खिलाफ भी आपत्ति: आंकड़ों में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है. 879 ऐसे आवेदन हैं, जिनमें आपत्ति दर्ज कराने वाले का नाम और जिस नाम के खिलाफ आपत्ति की गई है, वह एक ही है. यह कुल 12,209 वास्तविक आपत्तियों का करीब 7.2 प्रतिशत है.
कांग्रेस उठा रही सवाल: यही आंकड़ा अब राजनीतिक बहस को और हवा दे रहा है. कांग्रेस इन आंकड़ों को लेकर निर्वाचन आयोग और सरकार की मंशा पर सवाल उठा रही है. पार्टी को आशंका है कि बड़ी संख्या में आपत्तियों के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो सकती है और इसका राजनीतिक फायदा आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिल सकता है.
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमेंद्र बिष्ट कहते हैं कि-
यह आंकड़े वाकई में संदेह पैदा करते हैं. पार्टी यह मानती है कि कांग्रेस के खिलाफ भाजपा, निर्वाचन आयोग आपत्तियों के माध्यम से मतदाताओं को काटने या उन्हें मतदान से रोकने का काम कर रही है.-अमेंद्र बिष्ट, प्रवक्ता, कांग्रेस-
आपत्ति का मतलब वोटर का नाम हटना नहीं है: हालांकि आपत्तियों का दर्ज होना अपने आप में किसी मतदाता का नाम हट जाना नहीं है. आपत्ति के बाद संबंधित दावे और दस्तावेजों का सत्यापन होना है और उसके बाद ही अंतिम मतदाता सूची में नाम को लेकर फैसला होगा.
इसलिए SIR के बीच सामने आए ये आंकड़े फिलहाल राजनीतिक सवाल जरूर खड़े कर रहे हैं, लेकिन असली तस्वीर सत्यापन और अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही साफ होगी. फिलहाल एक ही नाम से दर्जनों और कई मामलों में सैकड़ों आपत्तियों ने निर्वाचन प्रक्रिया के साथ-साथ उत्तराखंड की राजनीति का तापमान भी बढ़ा दिया है.
बीजपी बोली कांग्रेस पहले ही हार मान चुकी है: इस मामले में भाजपा कांग्रेस के इन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर रही है. भारतीय जनता पार्टी के नेता जोत सिंह बिष्ट कहते हैं कि-
नाव से पहले ही कांग्रेस हार मान चुकी है और SIR प्रक्रिया में झूठे आरोप लगाकर अपनी हार को जस्टिफाई करना चाहती है. कांग्रेस खुद ही फर्जी आपत्तियां डलवा रही है और उसका आरोप भाजपा पर लगाना चाहती है.-जोत सिंह बिष्ट, भाजपा नेता-
