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उत्तराखंड में बेमौसमी बारिश, 179 हेक्टेयर एरिया में फसल बर्बाद, अतिवृष्टि से 522 किसानों को नुकसान

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बेमौसमी बारिश ने सबसे ज्यादा नुकसान टिहरी गढ़वाल और पिथौरागढ़ जिलों में पहुंचाया है. ये आंकड़े 1 अप्रैल से 5 मई तक के हैं

देहरादून: उत्तराखंड में गर्मी जैसे आते ही रफूचक्कर हो गई. उल्टा भारी बारिश और ओलावृष्टि ने प्रदेश में किसानों और काश्तकारों के लिए कई समस्याएं भी खड़ी कर दी हैं. उत्तराखंड में अप्रैल से मई के शुरुआती सप्ताह तक हुई अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने मैदानी से लेकर पर्वतीय जिलों तक खेती को नुकसान पहुंचाया है. कृषि निदेशालय, उत्तराखंड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल से 5 मई 2026 के बीच प्रदेश में लगभग 179.47 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है. इस दौरान 522 किसानों की फसलें प्रभावित होने की सूचना विभाग को मिली है.

उत्तराखंड में बेमौसम बारिश का प्रकोप: रिपोर्ट के मुताबिक नुकसान सबसे अधिक कुछ चुनिंदा जिलों में दर्ज किया गया. टिहरी जिले में सबसे ज्यादा करीब 87.40 हेक्टेयर, पिथौरागढ़ जिले में 48.47 हेक्टेयर और देहरादून जिले में 38.50 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ. इसके अलावा अल्मोड़ा जिले में 5 हेक्टेयर और चम्पावत में सीमित क्षेत्र में नुकसान दर्ज किया गया. कई अन्य जिलों से इस अवधि में नुकसान की सूचना नहीं मिली.

बेमौसमी बारिश ने फसलों को पहुंचाया नुकसान: कृषि विभाग के अनुसार अतिवृष्टि से मुख्य रूप से गेहूं, जौ, मटर, टमाटर, मसूर और बीन्स जैसी फसलें प्रभावित हुई हैं. मैदानी क्षेत्रों में जहां गेहूं और टमाटर को नुकसान पहुंचा, वहीं पर्वतीय जिलों में गेहूं, जौ, मटर और दलहनी फसलें मौसम की मार से प्रभावित हुईं. विभागीय आंकड़ों के अनुसार नुकसान का बड़ा हिस्सा असिंचित क्षेत्रों में सामने आया है, जबकि कुछ सिंचित क्षेत्रों में भी फसल क्षति दर्ज की गई. कृषि विभाग ने संबंधित जिलों से रिपोर्ट प्राप्त कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रशासनिक स्तर पर प्रभावित किसानों के आकलन और राहत प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर समीक्षा की जा रही है.

आम और लीची की फसल को भी नुकसान: देहरादून किसान संगठन के पदाधिकारी आशीष राजवंशी जो कि देहरादून में बासमती उत्पादन करने वाले सबसे बड़े किसान है, उन्होंने बताया कि-

बीते सप्ताह में जो लगातार भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई है, इससे सबसे ज़्यादा नुकसान काश्तकारों और सब्जी के किसानों को हुआ है. पहाड़ों पर कुछ नई पौध जो इस वक्त लगायी जा रही हैं, उसको भी काफी नुकसान हुआ है. ओले इतने खतरनाक पड़े हैं कि पूरा का पूरा पॉली हाउस क्षतिग्रस्त हो गया. मैदानों में लीची और आम को ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है.
-आशीष राजवंशी, पदाधिकारी, देहरादून किसान संगठन-

किसानों को मुआवजे की मांग: मुआवजे को लेकर किसान आशीष बताते हैं कि पॉली हाउस इत्यादि के मेंटेनेंस के लिए तो सरकार मदद करती है, लेकिन पारंपरिक किसानों को मुआवजे को लेकर किसानों को धरातल पर उतनी तत्परता से लाभ नहीं मिल पाता है.

आपदा प्रबंधन सचिव का बयान: उधर आपदा प्रबंधन सचिव ने बताया कि-

बारिश से प्रदेश में कृषि और बागवानी को नुकसान से इंकार नहीं किया जा रहता है. इसका आकलन लगातार कृषि विभाग कर रहा है. साथ ही साथ मुवावजा भी दिया जा रहा है. आपदा प्रबंधन और कृषि उद्यान विभाग की टीम लगातार फील्ड विजिट कर रही है और नुकसान को लेकर डेटा जुटा रही है.
-विनोद सुमन, सचिव आपदा प्रबंधन-

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