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गदरपुर में धर्म परिवर्तन के बाद SC प्रमाण पत्र निरस्त करने की कार्रवाई तेज, स्क्रूटनी कमेटी को भेजा गया मामला

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गदरपुर क्षेत्र में धर्म परिवर्तन और अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को लेकर एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है.

रुद्रपुर: जनपद उधम सिंह नगर के गदरपुर क्षेत्र में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. प्रशासन द्वारा की गई जांच के बाद एक व्यक्ति के एससी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. प्रमाण पत्र को निरस्त करने की संस्तुति जिला स्क्रूटनी कमेटी को भेज दी गई है. मामला धर्म परिवर्तन से जुड़ा होने के कारण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है.

जानकारी के अनुसार, ग्राम मजारशीला गदरपुर निवासी अरविंद सैनी ने प्रशासन को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि गांव में एक व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से चर्च का संचालन किया जा रहा है और लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू की गई. जांच के दौरान उप जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से राजस्व विभाग के अधिकारियों को मामले की जांच सौंपी गई. संयुक्त जांच में यह तथ्य सामने आया कि व्यक्ति मूल रूप से हिंदू धर्म के अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित था, लेकिन उसने कथित रूप से धर्म परिवर्तन कर लिया है. जांच में सोशल मीडिया को भी आधार बनाया गया.

अधिकारियों के अनुसार संबंधित व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर भी धर्म परिवर्तन की सार्वजनिक घोषणा के रूप में देखा गया. प्रशासन ने इसे जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना है. तहसीलदार गदरपुर द्वारा व्यक्ति को दिनांक 14 जनवरी 2019 को जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था. अब राजस्व उप निरीक्षक और राजस्व निरीक्षक की संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर इस प्रमाण पत्र को निरस्त करने की संस्तुति की गई है. उप जिलाधिकारी ऋचा सिंह ने बताया कि धर्मांतरण से जुड़े मामलों में माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों और संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए जांच की गई है. जांच पूरी होने के बाद सभी दस्तावेजों और संयुक्त आख्या को जिला स्क्रूटनी समिति को भेज दिया गया है, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार संविधान (Scheduled Castes) Order, 1950 के Clause 3 के तहत यदि कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाता है, तो अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है. इसी आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है. यदि जिला स्क्रूटनी समिति जांच रिपोर्ट को सही पाती है और जाति प्रमाण पत्र निरस्त किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को अनुसूचित जाति वर्ग के अंतर्गत मिलने वाले आरक्षण, सरकारी लाभ और SC/ST एक्ट के तहत मिलने वाले संरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा. फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई जारी है और अंतिम फैसला जिला स्तरीय स्क्रूटनी समिति द्वारा लिया जाएगा.

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