हॉट सीट बनी खानपुर, उमेश कुमार के इस्तीफे ने बढ़ाया सियासी पारा, हरीश रावत और चैंपियन भी मैदान में उतरे

Uttarakhand Assembly Election 2027 अगले साल के चुनाव में खानपुर विधानसभा सीट उत्तराखंड में नया सियासी अखाड़ा बन सकती है. रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा-
देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हरिद्वार जिले की खानपुर विधानसभा सीट पर सियासत ने नया मोड़ ले लिया है. निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफे के बाद इस सीट को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खानपुर से चुनाव लड़ने की इच्छा जताकर कांग्रेस के भीतर नई बहस छेड़ दी है तो वहीं पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने भाजपा से खानपुर और लक्सर दोनों सीटों पर टिकट की दावेदारी पेश कर दी है.
इन सबके अलावा निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने कांग्रेस और भाजपा में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए अपनी राजनीतिक पार्टी को मजबूत करने की बात कह कर राज्य की कई सीट पर चुनाव लड़वाने का दावा ठोका है. ऐसे में खानपुर की राजनीति अब केवल एक विधायक के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की रणनीति, पुराने सियासी टकराव और नए राजनीतिक विकल्पों की परीक्षा का मैदान बनती दिखाई दे रही है, यानि इस बार के चुनाव मे खानपुर भी बेहद हॉट होने वाली है.
उमेश कुमार का कहना है कि
वह विपक्ष के आंदोलनों और विधानसभा में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कांग्रेस साथ खड़े रहे, लेकिन जब हरिद्वार के किसानों और स्थानीय समस्याओं को लेकर समर्थन की जरूरत पड़ी तो कांग्रेस ने साथ नहीं दिया. मेरे कांग्रेस या बीजेपी में शामिल होने का इरादा नहीं है.
-उमेश कुमार, खानपुर विधायक-
उमेश कुमार का बड़ा राजनीतिक कदम: उमेश कुमार के बयानों से साफ संकेत मिल रहा है कि वो आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी अलग राजनीतिक पहचान को आगे बढ़ाना चाहते हैं. यानि वो अपनी राजनीतिक पार्टी जन निर्माण पार्टी को मजबूत करने और 2027 के चुनाव में आठ से दस सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना भी जता चुके हैं. ऐसे में इस्तीफे को केवल नाराजगी की प्रतिक्रिया मानने के बजाय उनके अगले राजनीतिक कदम और राज्य की राजनीति में अलग विकल्प खड़ा करने की कोशिश में राजनीति की जानकार देख रहें है.
हरीश रावत की खानपुर में दिलचस्पी से कांग्रेस के भीतर क्या बदलेगा: ऐसा नहीं है कि सिर्फ खानपुर में उमेश की ही चर्चा है, बल्कि खानपुर की राजनीति में नया मोड़ तब आया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत ने इस सीट से 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की.
रावत के मुताबिक खानपुर के लोगों ने उनसे यहां से चुनाव लड़ने का आग्रह किया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व को लेना है और पार्टी जहां से चुनाव लड़ने को कहेगी वह उसके अनुसार फैसला करेंगे. रावत की इस इच्छा ने खानपुर को कांग्रेस की चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण बना दिया है.
सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस सीट पर अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के इतिहास को ध्यान में रखते हुए रावत को मैदान में उतारने पर विचार करेगी या किसी स्थानीय चेहरे को प्राथमिकता देगी. फिलहाल इस पर पार्टी की ओर से कोई कुछ भी बोलने से बच रहा है.
रावत की संभावित उम्मीदवारी की चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि साल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी सरकार से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन के कारण उमेश कुमार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे. एक समय में उमेश ओर हरीश रावत के बीच नेता और पत्रकार के नाते अच्छी खासी मित्रता थी, लेकिन स्टिंग ऑपरेशन के बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ गई थी.
चैंपियन की दावेदारी से भाजपा में भी बढ़ी हलचल: खानपुर सीट पर भाजपा की तरफ से पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने भी अपनी दावेदारी खुलकर सामने रखी है. चैंपियन ने लक्सर और खानपुर दोनों विधानसभा सीटों से भाजपा का टिकट मांगने की बात कही है. खानपुर सीट से उनका पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है और 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी देवयानी सिंह भाजपा की उम्मीदवार थीं. उस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी उमेश कुमार ने जीत दर्ज की थी, जबकि देवयानी सिंह तीसरे स्थान पर रही थीं.
अब उमेश कुमार के इस्तीफे के बाद चैंपियन की ओर से दो सीटों पर दावेदारी जताए जाने से भाजपा में उस क्षेत्र के नेताओं के बीच बैचनी बढ़ गई है, क्योंकि अभी बीजेपी से ओम प्रकाश जमदग्नि और लक्सर के पूर्व विधायक संजय गुप्ता चुनाव लड़ने की तैयारियों में लगे हुए है.
उमेश कुमार और चैंपियन की पुरानी लड़ाई का भी रहेगा असर: खानपुर की राजनीति को समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक जानकार संजय आर्य कहते है कि
उमेश कुमार और कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 2022 के विधानसभा चुनाव में उमेश कुमार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर चैंपियन परिवार के राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी थी. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और विवाद कई बार सुर्खियों में रहे. जनवरी 2025 में दोनों पक्षों के बीच विवाद ने गंभीर रूप ले लिया था और गोलीबारी की घटना के बाद पुलिस कार्रवाई भी हुई थी.
-संजय आर्य, वरिष्ठ पत्रकार-
वरिष्ठ पत्रकार संजय आर्य का कहना है कि अब जब उमेश कुमार विधानसभा की सदस्यता छोड़ चुके हैं और चैंपियन फिर से खानपुर से भाजपा का टिकट मांग रहे हैं तो दोनों नेताओं की आगे की राजनीतिक रणनीति पर सबकी नजरें रहेंगी.
पुराने विवादों का आगामी चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसका आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी. चुनाव में स्थानीय विकास, किसानों की समस्याएं, रोजगार, क्षेत्रीय संपर्क और जनता के बीच उम्मीदवारों की सक्रियता जैसे मुद्दे उस इलाके में महत्वपूर्ण रहेंगे.
-संजय आर्य, वरिष्ठ पत्रकार-
2022 के नतीजों से खानपुर विधानसभा का गणित: खानपुर सीट का पिछला चुनाव यह दिखाता है कि यहां मुकाबला केवल दो राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीमित नहीं रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में उमेश कुमार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 38,767 वोट हासिल किए थे. वहीं बहुजन समाज पार्टी के रविंद्र सिंह 31,915 के आसपास वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे. वहीं सत्ता धारी दल बीजेपी की प्रत्याशी देवयानी सिंह तीसरे स्थान पर थीं. इन नतीजों ने साफ किया था कि खानपुर में स्थानीय राजनीतिक समीकरण और उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल खानपुर की राजनीति किस दिशा में जाएगी: उमेश कुमार के इस्तीफे ने खानपुर को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है. हरीश रावत की चुनाव लड़ने की इच्छा, चैंपियन की भाजपा से टिकट की मांग और उमेश कुमार की अलग राजनीतिक राह ये तीनों घटनाक्रम आने वाले महीनों में इस सीट की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन अभी कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार तय नहीं हैं और उमेश कुमार की अगली चुनावी रणनीति भी पूरी तरह सामने नहीं आई है. इसलिए फिलहाल किसी संभावित मुकाबले का परिणाम निकालने के बजाय इन तीनों नेताओं की राजनीतिक दिशा पार्टी नेतृत्व के फैसलों और स्थानीय मुद्दों पर नजर रखना अधिक महत्वपूर्ण होगा. खानपुर की असली चुनावी तस्वीर तभी साफ होगी जब दल अपने उम्मीदवारों और रणनीति को औपचारिक रूप से सामने रखेंगे.

