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देहरादून समेत इन तीन शहरों में एयर क्वालिटी सुधारने के लिए बनेगा प्लान, पढ़ें पूरी खबर

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उत्तराखंड के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स में बढ़ोतरी चिंता का सबब बनी रहती है. जिसको लेकर प्लान बनाया जाएगा.

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अब देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर में व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी है. इन तीनों शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पीएम-10 और पीएम-2.5 के स्तर को कम करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी. इसके लिए सड़कों से उड़ने वाली धूल, निर्माण और भवनों के ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे, वाहनों से होने वाले प्रदूषण और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं पर प्रभावी नियंत्रण की रणनीति तैयार की जा रही है. प्रदूषण नियंत्रण कार्यों का थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया जाएगा.

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तीनों शहरों में एयर क्वालिटी की लगातार निगरानी की जाएगी. खासतौर पर पीएम-10 और पीएम-2.5 के स्तर में कमी लाने के लिए अलग-अलग स्रोतों से होने वाले प्रदूषण की पहचान कर उसके आधार पर उपाय किए जाएंगे. माना जा रहा है कि शहरों में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल है. ऐसे में सड़कों की स्थिति सुधारने, कच्ची सड़कों को पक्का करने और फुटपाथों का निर्माण करने पर विशेष जोर दिया जाएगा.

इसके साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान धूल को नियंत्रित करने के उपायों को भी प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा. सड़कों पर निर्माण सामग्री लंबे समय तक पड़े रहने से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से रखे गए निर्माण सामग्री को हटाने की व्यवस्था भी की जाएगी. इससे शहरों में पीएम-10 के स्तर को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

भवनों को तोड़ने के बाद निकलने वाला मलबा यानी डेमोलिशन वेस्ट भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है. इसके लिए स्थानीय निकायों को उचित निस्तारण स्थल चिन्हित करने होंगे. भवनों के ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे को सड़क किनारे, खाली प्लॉट या अन्य खुले स्थानों पर फेंकने के बजाय निर्धारित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी. इसके लिए आम लोगों को भी जागरूक किया जाएगा, ताकि उन्हें यह जानकारी हो कि भवन निर्माण या ध्वस्तीकरण के बाद निकलने वाले मलबे का निस्तारण कहां किया जाना है.

वहीं पीएम-2.5 को नियंत्रित करने के लिए वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने के साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है. यदि जरूरत पड़ती है तो प्रदूषण की निगरानी और नियमों के अनुपालन के लिए मैनपावर बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे.

शहरों में बढ़ते यातायात जाम को भी वायु प्रदूषण से जोड़कर देखा जा रहा है. जाम के कारण वाहनों के लंबे समय तक सड़कों पर खड़े रहने से प्रदूषण बढ़ता है. ऐसे में प्रमुख चौराहों के सुधार और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा. इससे वाहनों की आवाजाही सुगम होने के साथ ही अनावश्यक उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है.प्रदूषण नियंत्रण के लिए काशीपुर मॉडल को दूसरे शहरों में लागू करने की तैयारी भी है. पिछले वर्षों की तुलना में काशीपुर में पीएम-2.5 के स्तर में हुए सुधार के कारणों का विश्लेषण किया जाएगा.

इसके बाद यह देखा जाएगा कि वहां अपनाए गए कौन से उपाय प्रभावी रहे और उन्हें देहरादून और ऋषिकेश जैसे अन्य शहरों में किस तरह लागू किया जा सकता है. तीनों शहरों में किए जा रहे प्रदूषण नियंत्रण कार्यों की प्रभावशीलता जांचने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की योजना भी है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में राष्ट्रीय शुद्ध वायु कार्यक्रम के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नई वार्षिक कार्ययोजना तैयार करनी होगी. इसमें प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों के आधार पर प्राथमिकता तय करते हुए ठोस प्रस्ताव शामिल किए जाएंगे.

साथ ही आम लोगों को वायु प्रदूषण के प्रति जागरूक करने के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से लगातार संदेश प्रसारित किए जाएंगे. स्मार्ट सिटी के तहत लगाए गए डिस्प्ले बोर्ड को भी सक्रिय करने की तैयारी है, ताकि लोगों को प्रदूषण के स्तर और उससे बचाव के उपायों की जानकारी मिलती रहे. इसको लेकर मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने भी अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए और उन्होंने कहा कि चिन्हित शहरों में मॉनिटरिंग को बढ़ाया जाए. साथ ही दिए गए निर्देशों के अनुसार ही जरूरी प्लान के तहत प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयास किए जाएं.

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