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भीषण गर्मी की तपिश लोगों को कर रही बीमार, पेट-आंख और त्वचा संबंधी मरीजों की तादाद बढ़ी, जानें कैसे बचें

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बढ़ती गर्मी के प्रकोप के कारण अस्पतालों में मरीजों की तादाद बढ़ रही है. पेट,आंख और त्वचा संबंधी मरीज सबसे ज्यादा हैं. रिपोर्ट- रोहित सोनी.

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार गर्मी का सितम बढ़ता जा रहा है. चिलचिलाती धूप ने जहां एक ओर लोगों का जीना दूभर कर दिया है, तो दूसरी तरफ बढ़ती गर्मी, बच्चों और बुजुर्गों को बीमार कर रही है. धूप की वजह से न सिर्फ पेट संबंधित बीमारियां हो रही हैं, बल्कि स्किन और आंखों से संबंधित रोगी भी अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टर भी इस गर्मी में बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत को अहम बता रहे हैं. ऐसे में जानते हैं कि इस गर्मी से बचने के लिए लोगों को किन खास बातों पर ध्यान देने की जरूरत है, और इस तपती गर्मी में बीमार पड़ने से कैसे खुद को बचाया जा सकता है.

उत्तराखंड समेत उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में हीट वेव के हालात बने हुए हैं. मैदानी राज्यों में गर्मियों के दौरान तापमान बढ़ने पर लोग पर्वतीय क्षेत्रों की ओर रूख करते थे, लेकिन वर्तमान समय में उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में भी बढ़ते तापमान ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. हालांकि, अप्रैल का महीना उत्तराखंड राज्य के लिए काफी अधिक हैरानी भरा रहा है. अप्रैल महीने के शुरुआती 2 हफ्ते के दौरान प्रदेश के उच्च हिमालय क्षेत्री में बर्फबारी का सिलसिला देखा गया, उसके अगले दो हफ्ते उत्तराखंड में गर्मी की तपिश देखी जा रही है. अचानक बदले मौसम और लगातार बढ़ रहे तापमान ने लोगों को बीमार करना शुरू कर दिया है.

बच्चों पर खास ध्यान देने की जरूरत: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे तापमान से खासकर बच्चों को बचाए जाने को लेकर उत्तराखंड शासन की ओर से पहले ही एडवाइजरी जारी हो चुकी है. क्योंकि बढ़ती गर्मी सबसे अधिक बच्चों और बुजुर्गों पर अपना कहर बरपाती है. यही वजह है कि प्रदेश के सभी स्कूलों में विशेष सावधानियां बरतने के साथ ही स्कूली बच्चों को समय-समय पर पानी पीने के लिए वाटर बेल बजाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, अस्पतालों में भी गर्मी से बचाव संबंधित दवाइयों का पर्याप्त मात्रा में स्टॉक रखने और विशेष वार्डों पर जोर दिया गया है. क्योंकि वर्तमान समय में अस्पताल में भी मरीजों की तादाद लगातार बढ़ने लगी है.

जानें बचने के लिए क्या करें: लगातार बढ़ रही गर्मी की वजह से न सिर्फ लोगों को पेट संबंधित बीमारियां हो रही हैं, बल्कि स्क्रीन और आंखों से संबंधित समस्याएं भी बन रही हैं. यही वजह है कि देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के साथ ही जिला अस्पताल, सीएचसी (सब हेल्थ सेंटर) और पीएचसी (प्राइमरी हेल्थ सेंटर) में भी गर्मी की वजह से बीमार हुए लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है. डॉक्टर लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि घरों से बाहर निकलने के दौरान तमाम विशेष सावधानियां बरतें. खासकर सुबह 11 से दोपहर 3 बजे के बीच बेवजह घर से बाहर न निकले और सीधे धूप के संपर्क में न आएं. इसके अलावा, अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें और समय-समय पर पानी का सेवन करते रहें.

ज्यादा जानकारी देते हुए आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. अर्चना कोहली ने कहा कि,

गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में सबसे पहले लोगों को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए. घर का शुद्ध और हेल्दी खाने के साथ ही पेय पदार्थ में नींबू पानी और छाछ (बटर मिल्क) का इस्तेमाल गर्मियों के समय में काफी अधिक बेहतर है. जबकि बाहर मिलने वाला पेयपदार्थ अनहाइजीनिक कंडीशन में बनता है, जिससे लोगों को बचने चाहिए. क्योंकि उस पेय पदार्थ में किस तरह के पानी का इस्तेमाल होता है, वो किसी को नहीं पता होता. ऐसे में जरूरी है कि अपने साथ पानी की बोतल लेकर चले.
– डॉ. अर्चना कोहली, चिकित्सा अधिकारी, आयुष –

डॉ. अर्चना ने बताया कि, गर्मियों के समय में लूज मोशन, टाइफाइड, पीलिया, डायरिया जैसी बीमारी आसानी से हो जाती है. लिहाजा खाने पीने की चीजों में सावधानियां बरतने की जरूरत है.

सेहत खराब कर सकता है ये कदम: जैसे-जैसे गर्मी पड़ रही है, उसी अनुसार सड़कों के किनारे पेयजल वेंडर्स की तादाद भी बढ़ती जा रही है. ऐसे में लोग अपने आप को हाइड्रेट रखने के लिए सड़कों के किनारे लगी दुकानों से पानी, शिकंजी या फिर गन्ने का जूस पी लेते हैं. लेकिन क्या ये सेहत के लिए सही है? इस पर दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के डिप्टी एमएस (मेडिकल सुपरिटेंडेंट) डॉ. एनएस बिष्ट ने कहा कि,

बाहर किसी भी पेयजल वेंडर्स से ली गई पेयजल सामग्री की कोई गारंटी नहीं होती है. ऐसे में घर से लाया हुआ पानी या फिर साफ पानी को ही पीना चाहिए. इसके अलावा, गर्मियों के दौरान हल्के भोजन यानी सुपाच्य भोजन जैसे खिचड़ी, दलिया, मूंग दाल, उबली सब्जियां, केला, पपीता और दही का सेवन करना चाहिए.
– डॉ. एनएस बिष्ट, डिप्टी एमएस, दून मेडिकल कॉलेज –

आंख संबंधी बीमारी के बचें: तापमान बढ़ने और गर्म हवाएं चलने से आंखों पर भी इसका काफी असर पड़ता है. मुख्य रूप से बढ़ती गर्मी के दौरान, आंखों का लाल होना या फिर आंखों में इचिंग की समस्या देखने को मिलती है. जिस पर दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय की नेत्र चिकित्सक डॉ. हिमानी पॉल ने कहा कि,

आंखों में एलर्जी, आंखों में रेडनेस, आंखों से पानी आना जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. ऐसे में घर से बाहर निकलते वक्त लोगों को चश्मा का इस्तेमाल करने के साथ ही धूल से बचने की जरूरत है. ऐसे में अगर किसी भी मरीज को आंखों में रेडनेस या फिर इचिंग की समस्या होती है तो वो नेत्र चिकित्सा से परामर्श लें. इसका घरेलू उपचार यही है कि ठंडा पानी से आंखों को धोए लेकिन गंदे हाथों से आंखों को छूने से बचे. इसके अलावा किसी भी मेडिकल स्टोर या दवाखाने से कोई भी आई ड्रॉप लेकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. वर्तमान समय में आंखों में एलर्जी के साथ ही आई फ्लू से संक्रमित मरीजों के मामले बढ़ गए हैं.
– डॉ. हिमानी पॉल, नेत्र चिकित्सक, दून मेडिकल कॉलेज –

चर्म रोग का खतरा: चिलचिलाती इस धूप के सीधे संपर्क में आने से लोगों की स्किन को भी काफी अधिक नुकसान पहुंच रहा है. मुख्य रूप से मरीजों के स्क्रीन में छोटे-छोटे दानों के साथ ही इचिंग की काफी अधिक समस्या देखी जा रही है. दून मेडिकल कॉलेज के चर्मरोग विभाग की एचओडी डॉ. श्रुति बरनवाल ने कहा कि,

बढ़ती गर्मी की वजह से लोगों के शरीर के खुले हिस्सों में लाल रंग के दाने, इचिंग की समस्या देखी जा रही है. मुख्य रूप से हाथों, गर्दन और चेहरे पर स्किन बर्न होने के साथ ही छोटे-छोटे दाने निकल रहे हैं. गर्मियों के दौरान स्क्रीन में फंगस के मामले भी काफी अधिक बढ़ जाते हैं. यही नहीं, महिलाओं की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट, जो चिपचिपे होते हैं, उनकी वजह से भी महिलाओं में साइड इफेक्ट देखे जा रहे हैं. ऐसे में लोगों को धूप से बचाव के लिए तमाम ऐतिहात बरतने की जरूरत है.
– डॉ. श्रुति बरनवाल, एचओडी, चर्मरोग विभाग, दून मेडिकल कॉलेज –

प्रदेश में लगातार बढ़ते तापमान और हीट वेव ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में और वृद्धि होने की संभावना है, जिससे विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गया है. राजधानी देहरादून में बढ़ती गर्मी के मद्देनजर डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच बेवजह घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है.

पेय पदार्थ और फलों का सेवन करें: चिकित्सकों ने खानपान में भी सावधानी बरतने की सलाह देते हुए तरबूज, नींबू पानी, जलजीरा और नारियल पानी जैसे पानी से भरपूर पेय पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल करने की बात कही है.

रायपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके झा ने बताया कि,

बढ़ती गर्मी को देखते हुए सभी आयु वर्ग के लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए. शरीर में पानी की कमी न होने दें और हल्के रंग के ढीले-ढाले कपड़े पहनें. विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों को अधिक सतर्क रहना चाहिए. अधिक मात्रा में पानी का सेवन करें, ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या न हो.
हीट वेव के दौरान चक्कर आना, सिरदर्द, तेज बुखार, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें. क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकती है.
– डॉ. एसके झा, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, सीएचसी रायपुर –

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