टिहरी झील के 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का बनेगा मास्टर प्लान, पर्यटकों के लिए जुटाई जाएंगी तमाम सुविधाएं

टिहरी झील में वाटर स्पोर्ट्स के साथ एडवेंचर, ट्रेकिंग, नेचर, कल्चर और विलेज टूरिज्म को भी एकीकृत रूप से विकसित करने की योजना है
टिहरी: प्रसिद्ध टिहरी झील को ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूरे क्षेत्र की सुनियोजित प्लानिंग की जाएगी. मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने करीब 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल करते हुए मास्टर और जोनल प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
इसमें सरकारी और निजी भूमि को भी शामिल किया जाएगा. ताकि, बेतरतीब विकास पर रोक लगाई जा सके. पर्यटन गतिविधियों को फेजवाइज विकसित करने के साथ वाटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर, ट्रैकिंग, नेचर, कल्चर और विलेज टूरिज्म को जोड़ा जाएगा. कम जलस्तर वाले महीनों में भी गतिविधियां जारी रखने के लिए सालभर का टूरिज्म कैलेंडर तैयार होगा.
बता दें कि टिहरी झील को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके लिए अब केवल झील तक सीमित विकास के बजाय आसपास के पूरे क्षेत्र की सुनियोजित प्लानिंग की जाएगी. मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने पर्यटन विभाग के साथ बैठक में टिहरी झील के आसपास करीब 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल करते हुए समग्र मास्टर प्लान और जोनल प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
सरकारी के साथ निजी भूमि भी किया जाएगा शामिल: मास्टर प्लान में सरकारी के साथ ही निजी भूमि को भी शामिल किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य टिहरी झील क्षेत्र में होने वाले बेतरतीब विकास को रोकना और अलग-अलग क्षेत्रों की उपयोगिता के आधार पर उनका नियोजित विकास करना है. इसके लिए जरूरत के अनुसार अलग-अलग जोन निर्धारित किए जाएंगे.
सीएस आनंद बर्धन दिए ये निर्देश: मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने निर्देश दिए कि मास्टर प्लान तैयार करते समय सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स से विचार-विमर्श किया जाए. ताकि, स्थानीय जरूरतों, भौगोलिक परिस्थितियों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं को योजना में शामिल किया जा सके.
टिहरी झील को खास पर्यटन केंद्र के रूप में किया जाएगा विकसित: मास्टर प्लान तैयार करने में स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर यानी SPA दिल्ली और SPA भोपाल से तकनीकी सहयोग लेने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा. योजना का फोकस टिहरी झील को ऐसा पर्यटन केंद्र बनाने पर है. जहां पर्यटक केवल कुछ घंटे बिताने के बजाय एक-दो दिन या उससे ज्यादा समय तक रुक सकें.
इसके लिए पूरे लेक एरिया में अलग-अलग मैगनेट एरिया विकसित किए जाएंगे. पर्यटन गतिविधियों को फेजवाइज आगे बढ़ाया जाएगा. वाटर स्पोर्ट्स के साथ एडवेंचर, ट्रेकिंग, नेचर, कल्चर और विलेज टूरिज्म को भी एकीकृत रूप से विकसित करने की योजना है. आसपास के गांवों को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया गया है.
पर्यटकों के लिए विशेष कार्ययोजना की जाएगी तैयार: टिहरी झील में एक बड़ी चुनौती जलस्तर से जुड़ी है. अप्रैल, मई और जून में जलस्तर कम रहने के दौरान भी पर्यटकों के लिए पर्याप्त गतिविधियां उपलब्ध रहें, इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी. मौसम और जलस्तर के अनुसार सालभर की पर्यटन गतिविधियों का कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.
रोजगार और स्वरोजगार के अवसर होंगे विकसित: इसके अलावा नए ट्रेकिंग रूट और ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे. गांवों में विलेज और कल्चरल विजिट की व्यवस्था विकसित कर पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन से जोड़ने की योजना है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकेंगे.
मुख्य सचिव ने टिहरी झील को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों का विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसे प्रधानमंत्री के समक्ष पेश किया जा सके. अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा. ताकि, झील क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों पर समन्वित तरीके से आगे की योजना तैयार की जा सके.

