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1965 भारत पाक युद्ध में शहीद हुए थे सिपाही मदन सिंह, 60 साल बाद पत्नी को मिले सहायता राशि के ₹28.45 लाख

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1965 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सिपाही मदन सिंह की पत्नी को 60 साल बाद आर्थिक मदद मिली.

बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की एक शहीद की वीरांगना को 6 दशक बाद आर्थिक सहायता मिली है. 1965 के भारत पाक युद्ध के दौरान शहीद हुए स्व. सिपाही मदन सिंह की वीरांगना देबुली देवी को 60 साल बाद शहीद की वीरांगना को मिलने वाली राशि की पहली किस्त मिली है. यह सहायता भारतीय सेना और सैनिक कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयासों से जारी की गई है.

वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में देश की रक्षा करते हुए बलिदान हुए स्व. सिपाही मदन सिंह की वीरांगना देबुली देवी को लगभग 60 साल बाद बड़ी आर्थिक राहत मिली है. भारतीय सेना और सैनिक कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयासों से उनके खाते में पहली किस्त के रूप में 28.45 लाख रुपए जमा किए गए हैं. सालों से लंबित पड़े इस प्रकरण के समाधान के बाद अब परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है.

इस मौके पर देबुली देवी ने बताया कि, उनके पति शहीद मदन सिंह 7 सितंबर 1965 को भारत-पाक युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे. उन्हें अब तक उदारीकृत पारिवारिक पेंशन (युद्ध, सीमा पर झड़प, उग्रवादी हमलों या किसी सक्रिय सैन्य अभियान के दौरान कर्तव्यों का पालन करते हुए वीरगति को प्राप्त होने पर मिलने वाली पेंशन)मिलती रही. लेकिन भारत सरकार से युद्ध में बलिदानियों की समीक्षा और लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए चलाए गए विशेष अभियान के तहत उनके मामले का पुनरीक्षण किया गया.

भारतीय सेना, जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय के लेफ्टिनेंट कर्नल वेद प्रकाश जोशी (सेना मेडल, सेवानिवृत्त), कुमाऊं रेजिमेंट और ओआईसी पीसीडीए प्रयागराज के समन्वित प्रयासों से यह राशि जारी की गई. उन्होंने बताया कि, लगभग इतनी ही दूसरी किस्त भी अभी मिलनी बाकी है.

सैन्य अधिकारियों के अनुसार, एनपीएसी और देय प्रमाणपत्र से संबंधित दस्तावेज ट्रेजरी कार्यालय और जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से प्रयागराज भेजे जाने हैं. प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेष बकाया राशि भी देबुली देवी के खाते में जमा कर दी जाएगी.

आर्थिक सहायता मिलने पर देबुली देवी ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी और उनके समस्त स्टाफ का आभार व्यक्त किया. कहा कि भारतीय सेना हमेशा वीर नारियों और पूर्व सैनिक परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी रहती है. उम्मीद जताई कि भविष्य में भी जरूरतमंद सैनिक परिवारों को इसी प्रकार सहायता मिलती रहेगी.

देबुली देवी ने कहा कि, इस प्रयास से उन हजारों सैनिक परिवारों के लिए भी उम्मीद बन गई, जिनके कई पुराने प्रकरण अब भी लंबित हैं. पहाड़ के दूरस्थ गांवों में रहने वाले पूर्व सैनिक परिवार अक्सर सरकारी प्रक्रियाओं और दस्तावेजी औपचारिकताओं के बीच उलझ जाते हैं. ऐसे में इस तरह की कार्रवाई न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता दिखाती है, बल्कि शहीद परिवारों के सम्मान को भी मजबूत करती है.

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