उत्तराखंड LUCC चिटफंड घोटाला, CBI ने 18 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

उत्तराखंड के सबसे बड़े ठगी में शामिल है LUCC चिटफंड फ्रॉड, जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले 18 धोखेबाजों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल![]()
देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) चिटफंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है. जिसके तहत 18 आरोपियों और एक संस्था के खिलाफ देहरादून स्थित विशेष बीयूडीएस (BUDS) कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है. जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई है.
सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS), उत्तराखंड जमाकर्ताओं के हित संरक्षण अधिनियम और अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 (Banning of Unregulated Deposit Schemes Act) की अलग-अलग धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है. मामले में अन्य अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच अभी चल रही है.
इन आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई चार्जशीट-
- समीर अग्रवाल
- शादाब हुसैन
- सानिया अग्रवाल (समीर अग्रवाल की पत्नी)
- उत्तम कुमार सिंह राजपूत
- माया सिंह राजपूत (उत्तम कुमार सिंह राजपूत की पत्नी)
- जितेंद्र सिंह निरंजन
- दिनेश सिंह
- गिरीश चंद सिंह बिष्ट
- जगमोहन बिष्ट
- उर्मिला बिष्ट (जगमोहन बिष्ट की पत्नी)
- ममता भंडारी
- तरुण कुमार मौर्य
- गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला
- सुशील गोखरू
- किशनलाल उदयलाल जैन
- पंकज कुशल सिंह जैन
- राजेंद्र सिंह बिष्ट
- लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी
क्या था मामला? सीबीआई की मानें तो साल 2025 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज एलयूसीसी (LUCC) घोटाले से जुड़ी 18 एफआईआर की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. इसके बाद 26 नवंबर 2025 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई. यह प्रदेश के सबसे बड़े घोटालों में से एक है. जिसके तहत 800 करोड़ रुपए जुटाए और 400 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी गई.
वहीं, जांच में सामने आया कि LUCC सोसायटी का गठन साल 2012 में हुआ था, लेकिन साल 2016 में समीर अग्रवाल ने इसका प्रबंधन अपने हाथ में लेकर नई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स बनाई. इसके बाद उत्तराखंड में 50 से ज्यादा शाखाओं के माध्यम से अवैध निवेश योजनाएं चलाई गईं.
जांच में पता चला कि संस्था का कोई वास्तविक कारोबार नहीं था और पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से जुटाई गई रकम से किया जाता था. सीबीआई ने इसे पोंजी स्कीम बताया है. सीबीआई के मुताबिक, करीब एक लाख निवेशकों से करीब 800 करोड़ रुपए जमा कराए गए. कुछ लोगों को आंशिक भुगतान किया गया, लेकिन करीब 400 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान ही नहीं किया गया.
मुख्य आरोपी विदेश फरार: सीबीआई के मुताबिक, मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था. उसने शेल (फर्जी) कंपनियों के जरिए निवेशकों का पैसा इधर-उधर ट्रांसफर कराया. जांच में ये भी सामने आया कि समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल विदेश फरार हैं. जिनके खिलाफ नोटिस और लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है.
जांच में पता चला कि शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत और दिनेश सिंह एलयूसीसी के महत्वपूर्ण पदाधिकारी थे. उनके खिलाफ भी सीबीआई ने चार्जशीट दायर की है. इसी तरह एलयूसीसी के चेस्ट मैनेजर तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी ने विभिन्न शाखाओं के जरिए एकत्र किए गए जमाकर्ताओं के पैसे को नकदी के रूप में विभिन्न स्थानों पर भेजा. इस तरह से वो बैंकिंग लेन-देन से बचे. लिहाजा, उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है.
इसके अलावा जांच में सामने आया है कि सुशील कुमार गोखरू ने किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर मुंबई, महाराष्ट्र में 10 शेल फर्मों के बैंक खाते खुलवाए. उत्तराखंड के जमाकर्ताओं से एकत्र की गई धनराशि इन शेल फर्मों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई. बाद में इन निधियों को लेयर्ड लेन-देन के जरिए सैकड़ों बैंक खातों में डायवर्ट किया गया.
39 संपत्तियां चिह्नित और 29 अस्थायी रूप से की गई कुर्क: सीबीआई ने जांच के दौरान आरोपियों की 39 संपत्तियों की पहचान की, जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में मौजूद हैं. इनमें से 29 संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने के आदेश किए जा चुके हैं. जबकि, बाकी 10 संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया जारी है.
न्यायिक हिरासत में सात आरोपी: बता दें कि सीबीआई अब तक इस मामले में 7 आरोपी तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन को गिरफ्तार कर चुकी है. फिलहाल, सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं. सीबीआई का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है.

