छह दशक पुरानी सिरोबगड़ की समस्या से मिलेगी निजात, पुल बनकर तैयार, लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

लोगों को जल्द सिरोबगड़ में भूस्खलन और बार-बार लगने वाले जाम की समस्या से निजात मिलने जा रही है.
रुद्रप्रयाग: बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोबगड़ में भूस्खलन और बार-बार लगने वाले जाम की समस्या से जल्द राहत मिलने की उम्मीद जगी है. करीब छह दशक से रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के लोगों के साथ ही चारधाम यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बने इस संवेदनशील स्लाइड जोन के स्थायी समाधान की दिशा में कालियासौड़–खांकरा बाईपास का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है. परियोजना के तहत तकनीकी खामी के चलते पिछले चार साल से अटका एक पुल अब बनकर तैयार हो गया है. करीब 126 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस महत्वपूर्ण परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
बाईपास का निर्माण पूरा होने के बाद सिरोबगड़ में भूस्खलन के कारण बार-बार बाधित होने वाले यातायात के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा. इससे बदरीनाथ और केदारनाथ धाम जाने वाले तीर्थयात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इसका वास्तविक लाभ बाईपास और इससे जुड़े सभी पुलों का निर्माण पूरा होने तथा मार्ग पर यातायात शुरू होने के बाद ही मिल सकेगा.
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सिरोबगड़ रुद्रप्रयाग जिले का प्रमुख संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र है. पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने के कारण यहां अक्सर यातायात बाधित हो जाता है. बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है, जबकि चारधाम यात्रा के समय वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की समस्या यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा देती है. कई बार मार्ग बाधित होने से तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. आपातकालीन सेवाओं और स्थानीय आवागमन पर भी इसका असर पड़ता है.
सिरोबगड़ स्लाइड जोन की समस्या का स्थायी समाधान कालियासौड़–खांकरा बाईपास का निर्माण है. इस मार्ग के तैयार होने से देश-विदेश से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी. साथ ही रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के लोगों को भी बार-बार लगने वाले जाम और यातायात बाधित होने की परेशानी से काफी हद तक छुटकारा मिल सकेगा.
-विमल सिंह, पूर्व प्रधान-
ऐसे में कालियासौड़–खांकरा बाईपास को सिरोबगड़ की इस पुरानी समस्या से राहत दिलाने वाली महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है. इसके तैयार होने से संवेदनशील हिस्से पर निर्भरता कम करने और यातायात को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.चारधाम परियोजना के तहत करीब 3.22 किलोमीटर लंबे कालियासौड़–खांकरा बाईपास का निर्माण किया जा रहा है. परियोजना में अलकनंदा नदी पर दो पुल और एक नाले पर पुल बनाया जाना है. इनके स्पान क्रमशः 182 मीटर, 189 मीटर और 258 मीटर निर्धारित हैं.
सिरोबगड़ में यातायात की समस्या से निपटने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है. बाईपास का निर्माण सीमेंट-कंक्रीट से किया जा रहा है और इसे मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. बाईपास का पूरा लाभ तभी मिल पाएगा, जब इसके साथ जुड़े तीनों पुलों का निर्माण भी पूरा हो जाएगा.
-अरुण कुमार पांडे, अधीक्षण अभियंता-
परियोजना के तहत सिरोबगड़ के निकट एक पुल का निर्माण तकनीकी खामी के चलते पिछले चार साल से लंबित था. अब इस पुल का काम पूरा हो गया है. इससे परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. बाईपास का निर्माण सीमेंट-कंक्रीट से किया जा रहा है और पूरी परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.अब इस महत्वपूर्ण परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना निर्माण एजेंसियों के लिए अहम चुनौती है. यदि तय समय पर बाईपास तैयार होकर यातायात के लिए खुल जाता है, तो आगामी चारधाम यात्राओं में सिरोबगड़ के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है.